हे कृष्ण धरा पर आओ
अबला की लाज बचाओ
एक दुख्रियारी गम की मारी
बिपदाओं से अब ये हारी
लेकर मन में कुछ उम्मीदें
आई है वो द्वार तिहारी
जब पांडव को बिपदा घेरा
जब द्रोपदी का था उठा बसेरा
पांचाली एक महल की रानी
जब उतर रहा था सर का पानी
जब केश पकड़ कर सभा में आई
तब तुमने आकर लाज बचाई
इस कलयुग नगरी के दुशासन
करते है अबला पर शासन
(नश्तर सी चुभती इस पीड़ा की राहत के लिए)
कुछ खुले केश के सकतों में
कुछ खो गई चिता के लपटों में
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

5 comments:
ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
मालीगांव
साया
लक्ष्य
हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से
अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"pro
हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें
सुन्दर प्रस्तुति.....
आपका लेखन सराहनीय है। आभार!
Post a Comment